निर्जला एकादशी के व्रत से मिलती है भगवान विष्‍णु की विशेष कृपा

By: Admin
Jun 05 2017
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आज निर्जला एकादशी है, इसे भीमसेन एकादशी भी कहते हैं। साल की 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्व है। पानी की एक बूंद तक पिए बिना व्रत रखने को निर्जला व्रत कहते हैं। निर्जला एकादशी का उपवास भी ऐसे ही किया जाता है। कहा जाता है कि निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन व्रत होता है। निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। कथाओं में ऐसी मान्यता है कि विधिपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है

ऐसे करें पूजा

इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्‍णु का ध्यान लगाकर व्रत का संकल्प लें और मंदिर जाएं। भगवान विष्‍णु की आराधना करें और पूजा अर्चना करें। इस दिन दान दक्षिणा करना ना भूलें। उपवास के अगले दिन मंगलवार को सुबह स्नान करके पूजा करें। इसके बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं। इसके साथ जल से भरे कलश के ऊपर सफेद वस्त्र रखकर और उसपर शक्कर रख ब्राह्मण को दान करें।

व्रत कथा : एक बार पाण्डु पुत्र भीमसेन ने श्रील वेदव्यासजी से पूछा, 'हे परमपूज्‍य विद्वान पितामह! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी व्रत करते हैं और मुझे भी करने के लिए कहते हैं, किन्तु मुझसे भूखा नहीं रहा जाता। आप कृपा करके मुझे कोई उपाय बताएं कि उपवास किए बिना एकादशी का फल कैसे मिल सकता है?'
श्रीवेदव्यासजी बोले, 'पुत्र भीम! यदि आपको स्वर्ग अत्यंत प्रिय लगता है, वहां जाने की इच्छा है और नरक से डर लगता है तो हर महीने की दोनों एकादशी को व्रत करना ही होगा।' भीम सेन ने जब ये कहा कि यह उनसे नहीं हो पाएगा तो श्रीवेदव्यासजी बोले, 'ज्येष्ठ महीने के शुल्क पक्ष की एकादशी को व्रत करना। उसे निर्जला कहते हैं। उस दिन अन्न तो क्या, पानी भी नहीं पीया जाता। एकादशी के अगले दिन प्रातः काल स्नान करके, स्वर्ण व जल दान करना। यह वृत करके पारण के समय (व्रत खोलने का समय) ब्राह्मणों व परिवार के साथ अन्नादि ग्रहण करके अपने व्रत को विश्राम देना। जो व्यक्ति एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पीए रहता है तथा पूरी विधि से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में जितनी एकादशियां आती हैं उन सब एकादशियों का फल इस एक एकादशी का व्रत करने से सहज ही मिल जाता है।' यह सुनकर भीमसेन उस दिन से इस निर्जला एकादशी के व्रत का पालन करने लगे और वे पाप मुक्त हो गए। इस एकादशी को भीमसेन एकादशी भी कहते हैं।


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