माना जाता है कि द्रौपदी ने भगवान श्री कृष्ण के सुझाव से यह व्रत रखा था. जिसके बाद पांड़वों को कुरुक्षेत्र के युद्ध में जीत मिली थी. रामचरितमानस के लंका काण्ड में भी इस बात का ज़िक्र है कि जो पति-पत्नी किसी भी कारणवश एक दूसरे से बिछुड़ जाते हैं, वो महिलाएं चंद्रदेव की पूजा करती हैं और कहती है कि ऐसा कभी ना हो कि उन्हें अपने सुहाग से बिछड़ना पड़े.